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मजदूर से श्रम राज्यमंत्री बने मनोहर लाल, पैसे की कमी थी तो 10वीं में छोड़ी पढ़ाई

मुल्क तक न्यूज़ टीम, ललितपुर. नोहर लाल पंथ, वो नेता जिसे बुंदेलखंड की दलित राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है। ये वो नेता हैं, जिन्होंने 22 साल में मजदूर से श्रम राज्यमंत्री तक का सफर तय कर लिया। योगी के मंत्रियों की सीरीज में आज कहानी उस मंत्री की जिसकी वजह से ललितपुर से 15 साल बाद भाजपा को जीत मिली। चलिए पूरी कहानी मनोहर के बचपन से शुरू करते हैं…

पैसों की कमी थी तो 10वीं में छोड़नी पड़ी पढ़ाई
साल: 1969 जगह: धौर्रा गांव, ललितपुर
15 साल के मनोहर दसवीं में पढ़ते थे। उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। परिवार का पेट पालने के लिए पिता मूर्ति बनाने का काम करते थे। जैसे-तैसे खाने के पैसे जुट पाते थे। घर में पैसे की समस्या बढ़ने लगी। मनोहर को 10वीं में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

राजनीति में आने से पहले मजदूरी करते थे मनोहर

पढ़ाई छोड़ने के बाद पैसे कमाने के लिए मनोहर अपने पिता को मूर्तियां बनाने में मदद करने लगे। इसके साथ-साथ बाकी बचे वक्त में वो मजदूरी करके भी कुछ पैसे कमा लेते थे।

यहां से शुरू हुआ मनोहर का राजनीतिक सफर
20 साल पहले तक बुंदेलखंड की राजनीति में बुंदेला परिवार एक बड़ा नाम था। कहा जाता था कि ललितपुर समेत बुंदेलखंड के जनप्रतिनिधि भी इसी घराने से तय किया जाता था। मनोहर लाल इस घराने के संपर्क में आए और धीरे-धीरे मनोहर की साख इस क्षेत्र में मजबूत होने लगी।

…यहीं से मनोहर की राजनीति में एंट्री हुई।

17 साल तक जिला पंचायत तक सीमित थी राजनीति

साल 1995: मनोहर पहली बार जिला पंचायत सदस्य बने। सीट का नाम था बांसी। शुरू से ही बीजेपी के साथ थे। जल्द ही अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष बना दिए गए। यहां से शुरू हुई राजनीति 17 साल तक जिला पंचायत के आसपास ही घूमती रही।
साल 2000: दोबारा जिला पंचायत चुनाव लड़े, हार गए। इसी चुनाव में अन्य सीट से खड़ी उनकी पत्नी कस्तूरी देवी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गईं।
साल 2005: मनोहर और उनकी पत्नी पंचायत चुनाव में फिर उतरे। इस बार दोनों हार गए।
विधानसभा चुनाव लड़े पर खत्म नहीं हुआ हार का सिलसिला
साल 2012: BJP के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन बसपा के फेरनलाल अहिरवार से महज 1700 वोटों से हार गए।

दूसरी बार BJP से चुनाव लड़े, 15 साल बाद खिलाया कमल

साल 2017: BJP ने मनोहर को फिर से टिकट दिया। ललितपुर की महरौनी विधानसभा से चुनाव लड़े। इस बार 99 हजार 564 वोटों से जीत गए। ये एक ऐसी सीट है, जहां पिछले 15 साल से BJP चुनाव नहीं जीती थी। मनोहर BJP से पहली बार चुनाव जीते। सीधे राज्यमंत्री बना दिए गए। बस यहीं से मनोहर की सियासी पकड़ मजबूत होने लगी।

इस बार जीत कर मनोहर दोबारा बने राज्यमंत्री
साल 2022: इस बार ललितपुर की महरौनी विधानसभा में योगी सरकार में मनोहर ने 1 लाख 84 हजार 778 वोट पाकर दोबारा जीत का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने बसपा प्रत्याशी किरन रमेश खटीक को 1 लाख 10 हजार 451 वोटों के अंतर से हराया। यहां सपा प्रत्याशी रामविलास रजक 58 हजार 381 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। 25 मार्च को मनोहर ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली। 28 मार्च को उन्हें श्रम और सेवायोजन मंत्री बनाया गया।

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