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कहानी: मधुर मिलन

इनाया तपन और उस के पूरे परिवार के सहयोगपूर्ण व केयरिंग रवैए  से अभिभूत थी. 


“हैलो पापा, जल्दी घर आ जाइए. दादी को फिर से अस्थमा अटैक पड़ा है. वे बारबार आप को याद कर रही हैं,” तपन के बड़े बेटे रिदान ने अपने पिता तपन  से कहा, जो कंपनी के टूर पर पुणे गए हुए थे.

“बेटा, बहुत जरूरी मीटिंग है परसो, उसे अटेंड कर ही वापस आ पाऊंगा. तब तक ऐसा करो, डाक्टर सेन  को बुला लो. उन के इंजैक्शन से दादी को फौरन आराम हो जाएगा. घर मैनेज नहीं हो पा रहा हो, तो मेरे आने तक इनाया आंटी को बुला लो.”

“जी पापा, ठीक है. वैसे, दादू की तबीयत भी ठीक नहीं. उन के जोड़ों का दर्द उभर आया है. मेरा पूरा वक्त दादू  और दादी की देखभाल में ही बीत जाता है.  अगले हफ्ते मेरे टर्म एग्जाम हैं.”

“ठीक है बेटा, मैं संडे को आ रहा हूं.”

रिदान से बातें कर तपन कुछ परेशान सा हो गया. जब से उस की पत्नी मौनी की सालभर पहले कैंसर से मौत हुई है, घर घर न रहा था.  सबकुछ अस्तव्यस्त हो गया था. तभी  उस के फोन पर औफिस का कोई मैसेज आया और वह अपने काम में व्यस्त हो गया.

उस के घर पर रिदान  और रूद्र उस के 2 बेटे दादी की देखभाल में व्यस्त थे, जिन्हें अस्थमा का गंभीर दौरा पड़ा था. उन के लिए फ़ैमिली डाक्टर बुलाया गया था. कुछ ही देर बाद दादी को देख कर वह  जा चुका था. डाक्टर के दिए  इंजैक्शन से दादी को आराम आ गया और वे शांत लेटी थीं.  लेकिन अब दादू  अपने जोड़ों के दर्द से कराहने लगे, रिदान  से बोले, “रिदान बेटा, जरा सेंक की बोतल में गरम पानी भर कर ले आ.”

रिदान सेंक  की बोतल लेने दूसरे कमरे में गया ही था कि तभी रुद्र वहां पहुंच गया और रिदान से बोला, “भैया, परसों मेरा फ़िजिक्स का टर्म एग्ज़ाम है, लेकिन बिलकुल पढ़ाई नहीं हो पा रही. दादी, दादू के साथ पढ़ाई करना बहुत मुश्किल हो रहा है. मम्मा कितनी अच्छी तरह से घर मैनेज कर लेती थी न. मम्मा  की बहुत याद आ रही है, भैया.  यह सबकुछ हमारे साथ ही क्यों हुआ?  हमारी मम्मा हमें छोड़ कर चली गई इतनी जल्दी. मेरे सब फ्रैंड्स की मम्मा हैं.  जब वे लोग अपनी अपनी मम्मा की बातें करते हैं, तब मुझे बहुत फील होता है.”


“रुद्र, हम दोनों का समय ही खराब है.  चलो, जो चीज हमारे कंट्रोल में नहीं है, हमें उस के बारे में शिकायत नहीं करनी चाहिए. बी थैंकफ़ुल, कि पापा और  दादू-दादी हमारे पास हैं. चिंता मत कर, अब सबकुछ मैनेज हो जाएगा. पापा ने इनाया आंटी को बुलाने के लिए कहा है.”

तभी रिदान ने इनाया को फोन कर के कहा, “हैलो इनाया आंटी, गुड आफ्टरनून. आंटी, पापा  टूर पर गए हुए हैं, और यहां दादी को अस्थमा का अटैक पड़ा है. अभी तो खैर डाक्टर ने इंजैक्शन लगा दिया है और उन को आराम आ गया है. दादू के जोड़ों का दर्द भी उभर आया है. इधर रामकली आंटी भी हम से मैनेज नहीं हो पा रहीं.  टाइमबे टाइम आती हैं और उन्हें कुछ कहो, तो जवाब देना शुरू कर देती हैं. दादीदादू भी कुछ कहते हैं, तो उन की भी नहीं सुनतीं. कुछ दिनों के लिए आप प्लीज़, अमायरा के साथ घर आ जाइए न.”

“पापा कहां गए हैं? कब लौटेंगे?”

“पापा संडे तक आएंगे. आंटी प्लीज, आ जाइए.  अमायरा  को साथ में जरूर लाइएगा.”

“ओके बेटा, चिंता मत करो. मैं आती हूं 5 बजे तक.”

5  बजते ही अपने वादे के मुताबिक इनाया तपन के घर अमायरा के साथ आ गई. आते ही उस ने बेहद कुशलता से घर संभाल लिया.

इनाया के सहज, मृदु व्यक्तित्व में अनोखी ऊष्मा थी, जिस से उस के संपर्क में आने वाला हर शख्स अनचाहे उस की ओर खिंचा चला आता और उस की सहृदयता का कायल हो उठता. लेकिन उस के ज़िंदादिल व्यक्तित्व के आवरण में दर्द का अथाह समंदर छिपा था, जो उसे उस के अपनों ने ही दिया था.

उस ने अपनी युवावस्था में अपने मातापिता की मरजी के विरुद्ध उन से विद्रोह कर के एक युवक से विवाह कर लिया था. लेकिन कैरियर में बेहतरी की अपेक्षा में वह उसे और नन्ही अमायरा को छोड़ कर दुबई चला गया. फिर वह कभी लौट कर नहीं आया. वहीं बस गया. सुनने में आया था कि उस ने वहीं किसी और युवती से निकाह  कर लिया था.

इनाया रिदान और  रुद्र की मृत मां मौनी की कालेज के जमाने की बेस्ट फ्रैंड  थी. मौनी इनाया के जीवन के हर पल की साझेदार थी. मौनी से दांतकाटी दोस्ती के चलते दोनों का एकदूसरे के घर नियमित रूप से आनाजाना, उठनाबैठना था. सो, दोनों  एकदूसरे के पति से भी ख़ासी  करीब थीं  और खुली हुई थीं. इनाया के पति के दुबई चले जाने के बाद मौनी और तपन ने इनाया के  सच्चे दोस्तों की भूमिका निभाते हुए उसे बेइंतहा भावनात्मक सहारा दिया और उन दोनों की वजह से वह बहुत हद तक अपने पति के दिए हुए आघात  से उबर कर वापस सामान्य हो पाई थी.

शाम के 5  बज चुके थे. रिमझिम बारिश हो रही थी.

“इनाया आंटी,  इस सुहाने मौसम में कुछ बढ़िया चटपटा खाने का दिल कर रहा है. आंटी, आप  बहुत बढ़िया चाप बनाती हैं न. प्लीज,  रामकली आंटी से बनवा दीजिए न,” रुद्र ने इनाया से फ़रमाइश की.

“ओके बेटा, अभी बनवाती हूं.”

“इनाया, हम दोनों को तो तुम्हारा यह मरा  चाओ बिलकुल अच्छा न लगे है. कुछ बढ़िया जायकेदार देसी खाना हम दोनों के लिए बनवा दे.”

“अच्छा आंटी, नो प्रौब्लम.  आप दोनों के लिए पकौड़ी  बनवा देती हूं. साथ में, हलवा भी.”

“अरे वाह बेटा, नेकी और पूछपूछ?  तूने तो मेरे दिल की बात कह दी. प्रकृति तुझे सातों सुख दे.”

“अरे आंटी, प्रकृति आप की बात मान ले, तो बात ही क्या थी? सातों सुख तो दूर की बात है, एक सुख ही  दे दे, तो बात बन जाए.”

“इनाया बेटा, ऐसी मायूसी की बातें क्यों करती है. तुझ से तो मौनी कहतेकहते हार गई. उस ने अपने जीतेजी तेरे लिए गठबंधन डौट कौम से कितने रिश्ते ढूंढे, लेकिन तूने किसी रिश्ते के लिए हामी  ही नहीं भरी. और अब जब अकेले रहने का फैसला तेरा है, तो इस के लिए शिकायत कैसी?  हिम्मत से हंसीखुशी जिंदगी जी, बेटा.”

तभी रामकली कमरे में आई और उस ने  कहा, "अम्माजी और सब लोग डाइनिंग टेबल पर आ जाइए. चाओ और हलवा बन गए  हैं.
“आंटी,  बात तो आप सही कह रही हैं. मुझे अपने सिंगल रहने के फैसले से कोई गिला नहीं. अब तो कंपनी के लिए अमायरा  भी है. बस, अब मेरा शरीर साथ नहीं देता. मेरा ब्लडप्रैशर दवाई लेने के बावजूद हमेशा बहुत हाई रहता है. तबीयत  हर समय गिरीगिरी रहती है.”

“इनाया बेटा, तेरा  यह हाई ब्लडप्रैशर भी तेरे इस अकेलेपन की वजह से है. बेटा, जिंदगी के सफ़र में कोई सुखदुख बांटने वाला हो, तो जिंदगी की मुश्किलें आसान हो जाती हैं. लेकिन तुम लोगों को यह बात समझ में आए, तब तो. मुझे तो अब तपन की चिंता खाए  जाती है.  कैसे अकेले  ज़िंदगी काटेगा. अभी तो, खैर, हम दोनों हैं, ये दोनों बेटे हैं, तो उस का समय ठीकठाक कट जाता है.  कल को जब हम दोनों नहीं होंगे, दोनों बेटे पढ़लिख कर नौकरी पर चले जाएंगे, तब उस का क्या हाल बनेगा?”

“अरे आंटी, कल की चिंता  आज क्यों करनी? सब अच्छा ही होगा. आप की तो दोदो बहुएं आएंगी. सेवा करेंगी.  मैं तो अमायरा की शादी के बाद अकेली रह जाऊंगी.”

“अरी बिट्टो रानी, तभी कहती हूं, अभी भी वक्त है. कोई अच्छा सा समझदार लड़का देख कर शादी कर ले.  तेरा ब्लडप्रैशर जड़ से छूमंतर न हो जाए, तो मुझ से कहना.”

“अरे आंटी, अब इन बच्चों के सामने आप भी कैसी बातें कर रही हैं. अब तो इन बच्चों की शादी का समय आएगा. अमायरा 22 साल की तो हो ही गई. और पांचछह साल की बात है.”

“मैं अपनी प्यारी मम्मा को छोड़ कर नहीं जाने वाली. आप निश्चिंत रहो. मैं कभी शादी नहीं करूंगी,”  अमायरा ने अपनी मां के गले में अपनी बांहें डालते हुए और उन्हें एक झप्पी देते हुए उस से कहा.

तभी अमायरा को छेड़ते हुए रुद्र बोला, “बातबात पर रोब  जमाने वाली इस कटखनी  बिल्ली के लिए  तो मैं ही कोई समझदार बागड़बिल्ला ढूंढूँगा.  इसे कोई सीधासादा मुरगा मिल गया, तो यह तो उस पर दादागीरी  जमा जमा कर उस का कचूमर ही निकाल देगी.”

“आज तो तू  गया रुद्र बेटा,  अब तू मेरे पास अपना प्रोजैक्ट बनवाने आया, तो तेरी खैर नहीं,” यह कहते हुए अमायरा ने एक कुशन  उठा कर उस से उसे मारते हुए कहा और हंसते हुए उसे मुंह चिढ़ाने लगी.

सभी लोग उन दोनों की यह चुहलबाज़ी देख कर हंस पड़े.

तभी रामकली कमरे में आई और उस ने  कहा, “अम्माजी और सब लोग डाइनिंग टेबल पर आ जाइए. चाओ और हलवा बन गए  हैं. बस, अब  पकौड़े बनाऊंगी.”

सब ने खुशगवार माहौल में हंसतेचहकते  स्वादिष्ठ खाने  का आनंद उठाया.

इनाया और अमायरा के साथ दोतीन दिन मानो पलक झपकते बीत गए.

तपन के वापस आने पर इनाया और अमायरा भी अपने घर लौट गईं.

उसी दिन देररात रुद्र और रिदान  बातें कर रहे थे. रुद्र रिदान  से बोला, “भाई, इनाया आंटी और अमायरा के जाते ही घर कितना सूनासूना  हो गया,  है न?”

“हां रुद्र, उन्हें तो जाना ही था न.”

“पर भाई, मैं सोच रहा हूं, क्या कुछ ऐसा नहीं हो सकता कि इनाया आंटी हमेशा  हमारे साथ आ कर रहने लगें? भैया, इनाया  आंटी कितनी अच्छी है न? और अमायरा भी?”

“हां रुद्र, दोनों बहुत ही अच्छी हैं.”

तभी कुछ सोच कर रुद्र रिदान से बोला, “भाई, क्या पापा और इनाया आंटी की शादी नहीं हो सकती? कितना अच्छा हो, अगर  दोनों शादी कर लें. फिर तो इनाया आंटी और अमायरा हमारे घर पर ही रहने लग जाएंगी.”

“रुद्र, 11  बजने  आए.  अब सो जा.  शेखचिल्ली जैसी बातें करना बंद कर.”

“अरे भैया,  मैं प्रैक्टिकल बातें कर रहा हूं.  मेरे एक दोस्त माणिक की मम्मा ने अभी पिछले महीने ही किसी से शादी की. और अपने नए पापा के यहां वह बहुत खुश है.  सोचो, भैया सोचो, यह बिलकुल प्रैक्टिकल भी है.”

“वह  तो खैर है, लेकिन इतनी उम्र में शादी करने से हम दोनों और उन की लाइफ में बहुत कौम्प्लीकेशन आ सकते हैं. तू अभी बच्चा है, नहीं समझेगा.”

“कम औन भैया, मैं इतना भी छोटा नहीं. अगले महीने पूरे 20  का हो जाऊंगा. पहले आप अपनी बताओ, क्या आप नहीं चाहते कि हमारे घर में खुशियां फिर से आएं. पापा की जिंदगी फिर से गुलज़ार  हो. फिर अनाया आंटी देखीभाली हैं.  हम दोनों और पापा से भी उन की गहरी बौन्डिंग है.  भैया, वे पापा के लिए परफैक्ट मैच हैं.”

“मेरा छोटा भाई इतना समझदार है, मुझे तो पता ही नहीं था. हां रूद्र, बातें तो तू सही कह रहा है. इधर मम्मा के जाने के बाद पापा  कितने उदास हो गए हैं. हरदम बुझेबुझे रहते हैं. हंसना तो जैसे भूल ही गए हैं.”


“हां भैया, और इनाया आंटी भी मुझे बहुत डिप्रैस्ड सी लगती हैं. अगर  पापा और इनाया आंटी शादी कर लें  तो दोनों की ज़िंदगी कितनी  हैप्पी, गो लकी हो जाएगी.  हमारे लिए भी जिंदगी बहुत आसान हो जाएगी.”

“अभी इनाया आंटी घर पर थीं, तो घर का माहौल कितना अच्छा हो गया था. पापा भी काफी रिलैक्स्ड लग रहे थे.”

“हां, तू बात तो बिलकुल सही  कह रहा है, लेकिन इस के लिए हमें अमायरा से भी बात करनी होगी. इनाया  आंटी को तो वही तैयार करेगी न. और हां, इस सब से पहले हमें इस के लिए दादूदादी की अनुमति भी लेनी होगी. चल, अब सो जा वरना तू सुबह टाइम पर नहीं उठ पाएगा.”

“ओके भाई, गुडनाइट.”

रुद्र  तो बहुत जल्दी सो गया, लेकिन आज रिदान  की आंखों में नींद नहीं थी. उस का मन बारबार एक ही ख़याल के इर्दगिर्द भटक रहा था, ‘अगर पापा और आंटी सच में एक हो जाएं, तो पापा को नई ज़िंदगी मिल जाएगी.’

अगले ही दिन रिदान ने  डरतेडरते दादूदादी  के सामने पापा और इनाया  आंटी के विवाह की बात छेड़ दी  थी.

आशा के विपरीत दोनों में से किसी ने कोई उग्र प्रतिक्रिया नहीं दी. बस, उस की इस बात पर दादी जरूर थोड़ा भड़क गईं यह कहते हुए कि “इनाया अपने धर्म की नहीं है.  इसलिए 2 विभिन्न  धर्म, रीतिरिवाज़,  सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के चलते उन के विवाह के सफल होने के चांस बहुत कम हैं.”

इस पर रिदान  ने उन्हें अपना तर्क दिया कि, “दोनों की जानपहचान और बौन्डिंग के बहुत गहरे होने की वजह  से दोनों के एकदूसरे के साथ ऐडजस्टमैंट में कोई दिक्कत नहीं आएगी.”

“यह क्या ऊलजलूल बोल रहा है, बेटा? इनाया और तपन का कोई मेल नहीं. वह मुसलमान है, जबकि हम हिंदू.”

इस पर इनाया ने तनिक नानुकुर करते हुए उस से  कहा, "बेटा, इन दिनों मेरे औफिस में काम का प्रैशर बहुत ज्यादा है.
“मेल क्यों नहीं दादी?  उन दोनों का ही तो मेल परफैक्ट है. दादी, क्या आप ने गौर किया है, पापा और आंटी में कितनी गहरी दोस्ती है? मम्मा  के बाद अगर पापा किसी से खुले हुए हैं तो वह इनाया आंटी ही हैं. अभी जब इनाया आंटी यहां थीं,  मम्मा के जाने के बाद पापा पहली बार इतने खुश  लगे मुझे. प्लीज दादूदादी, आप दोनों इस  शादी के लिए मान जाइए. बाकी  हम संभाल लेंगे.”

“पर बेटा, वह मुसलमान है,  दूसरे धर्म की है.”

“दादी, आप ही तो कहती हैं, इंसान का सब से बड़ा धर्म उस का स्वभाव, उस की इंसानियत होता है. इनाया  आंटी इस कसौटी  पर तो खरी उतरती हैं न. कितने मीठे स्वाभाव की, जैंटल और हंसमुख हैं. उन के आने से घर जैसे चहक उठता है. फिर पापा के साथ उन की कंपैटिबिलिटी गजब की है. क्या आप चाहती हैं कि पापा एक  फ्रस्ट्रेटेड  जिंदगी जिएं  और ताउम्र घुटते  रहें. मुझे तो डर है वे कहीं डिप्रैशन में न चले जाएं. मम्मा की डेथ के बाद कितने इमोशनल हो गए हैं वे. बातबात पर तो उन के आंसू निकल पड़ते हैं.”

यह सुन कर  दादू बीच में बोल पड़े, “रिदान बेटा, मेरे लिए तपन की खुशी से बढ़ कर कुछ नहीं. अगर तपन को इस रिश्ते से कोई एतराज नहीं, तो इस रिश्ते के लिए हमारी हां है. दादी की चिंता तुम बिलकुल मत करो, मैं उन्हें समझा दूंगा.”

दादू की तरफ से इस रिश्ते के लिए ग्रीन सिग्नल मिलते ही रिदान खुशी से झूम उठा और बहुत सोचसमझ कर उस ने अमायरा को इस मुद्दे पर बात करने के लिए अपने घर बुलाया.

शुरू में तो अमायरा को यह आइडिया बहुत अटपटा सा लगा, लेकिन जब रिदान और रुद्र ने  दोनों की  दिनोंदिन बढ़ती उदासी और गिरते स्वास्थ्य का हवाला दिया, तो उस ने भी उन दोनों की इस बात से सहमति जता दी और इस मुद्दे पर उन का साथ देने का पक्का वादा किया.

तभी  कुछ दिनों में इस योजना को अमलीजामा पहनाने का मौका खुदबखुद उन के सामने आ गया.

उन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही थी. दादी पिछले 10  दिनों से वायरल फ़ीवर से निढाल पलंग पर पड़ी थीं.  तभी रुद्र को भी वायरल फ़ीवर हो गया.

उसे बुखार आए 3 दिन हो गए थे, लेकिन वह टूट नहीं रहा था. बीमारी की वजह से वह बेहद चिड़चिड़ा हो गया था. बातबात पर चिढ़ने  लगा था.

उस दिन पापा से इनाया आंटी को घर बुलाने की जिद पकड़ बैठा, “पापा, इनाया आंटी को बुला दीजिए न. मम्मा भी मुझे छोड़ कर चली गई. मुझे इनाया आंटी चाहिए. इनाया  आंटी में मुझे बिलकुल मम्मा की फ़ील आती है. प्लीज पापा, आप तो औफिस चले जाएंगे. दादी  भी बीमार पड़ी हैं.”

“बेटा, जिद मत करो. इनाया आंटी की अपनी नौकरी है, काम है. बातबात पर उन्हें यहां बुलाना कुछ  ठीक सा नहीं लगता मुझे, ” तपन बोले.

“पापा, क्यों न इनाया आंटी और अमायरा  हमारे यहां हमारे साथ ही रहें. हमारा घर इतना बड़ा है. दोनों घर के नए बने पोर्शन  में बड़े आराम से रह सकती हैं. मम्मा  के बिना घर कितना सूनासूना हो गया है. आंटी और अमायरा के आने से घर कितना लाइवली हो जाता है. पापा,  उन्हें फोन कर दीजिए न,” लेकिन थोड़ी देर तक पिता से कोई जवाब न पा कर वह फिर बोला, “आप उन्हें नहीं बुलाएंगे तो मैं उन्हें बुला लेता हूं.” यह कहते हुए रुद्र ने इनाया को फ़ोन कर के उन से कहा, “आंटी प्लीज़, आप अमायरा के साथ यहां अभी आ जाइए न. मुझे वायरल फ़ीवर हो रहा है.”

इस पर इनाया ने तनिक नानुकुर करते हुए उस से  कहा, “बेटा, इन दिनों मेरे औफिस में काम का प्रैशर बहुत ज्यादा है. सो, अभी  मुझे वहां आना थोड़ा मुश्किल लग रहा है.” लेकिन रुद्र ने उन की एक न सुनी और अपनी तुरुप चाल चली, “आंटी, मम्मा के बाद आप ही तो उन  जैसी हैं. आप नहीं आएंगी तो मुझे  और कौन संभालेगा?  आप का तो हमेशा वर्क फ्रौम होम  ही रहता है. तो, आप यहीं से अपना काम भी कर लीजिएगा.  आ जाइए न आंटी, प्लीज़. मैं आप का वेट कर रहा हूं.”

उस के  इस हठ पर विवश इनाया  को उस के घर आना ही पड़ा.

इनाया और अमायरा के घर आते ही घर की खोई रौनक मानो वापस आ गई.

रिदान की इंजीनियरिंग खत्म हो गई थी और उस के अपने कैंपस सेलैक्शन में लगी नौकरी पर जाने का वक्त आ गया था. एक  माह बाद उसे बेंगलुरु में अपनी नौकरी जौइन करनी थी. जैसेजैसे उस के वहां जाने के दिन नजदीक आ रहे थे, उसे अपने पीछे पापा और दादूदादी को ले कर घनघोर टैंशन हो रही थी.

इनाया स्वभाव से बेहद केयरिंग और बड़े दिल की थी. घर के सभी सदस्यों के खानपान और अन्य जरूरतों का बेहद ध्यान रखती.

पापा, दादू और दादी को ब्लडप्रैशर और डायबिटीज की शिकायत थी. मां की मृत्यु के बाद पापा का ब्लडप्रैशर और डायबिटीज़  हमेशा हाई रहने लगे थे.

इनाया आंटी मम्मा  की तरह उन दोनों के लिए अपनी देखरेख में परहेज का खाना बनवातीं. हमेशा रुद्र और रिदान  की फरमाइश का स्वादिष्ठ खाना बनवातीं.

अमायरा से फ़ौरन इस मुद्दे पर बात करने की सोच कर उस ने घरभर में अमायरा को ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली.
उस के और इनाया आंटी के जाने के बाद उन सब की हैल्थ और खानेपीने का कौन ध्यान रखेगा, यह सोचसोच वह हलकान हुआ जा रहा था.

उस दिन पापा औफिस से आए तो  अचानक चक्कर आने की शिकायत करने लगे. ब्लडप्रैशर  चैक करने पर उन का ब्लडप्रैशर बहुत हाई आया. शुगर लैवल भी बहुत हाई आया. इनाया  आंटी ने फौरन उन के फैमिली डाक्टर को फोन कर बुलाया. डाक्टर ने पापा को इंजैक्शन लगाए और तब पापा का ब्लडप्रैशर और शुगर लैवल सामान्य हुए.

पापा का यह हाल देख रिदान का पापा और अनाया आंटी को  वैवाहिक बंधन में बांधने का निश्चय और पुख्ता हुआ.

अमायरा से फ़ौरन इस मुद्दे पर बात करने की सोच कर उस ने घरभर में अमायरा को ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली. तभी उस ने खिड़की से देखा, वह बाहर बगीचे में पेड़पौधों को पानी दे रही थी.

वहां जा कर उस ने उस से कहा, “अमायरा, मैं सोच रहा हूं, मेरे नौकरी पर जाने के बाद पापा का ध्यान कौन रखेगा? आंटी पापा और दादूदादी का ध्यान बिलकुल मम्मा की तरह रखती  हैं. मेरे पीछे इन लोगों  की केयर कौन करेगा, यह सोचसोच कर मुझे बहुत चिंता  हो  रही  है. क्यों न मेरे बेंगलुरु जाने से पहले हम  इन दोनों की शादी करवा दें?”

“बात तो तुम पते की कर  रहे हो. मैं ने भी औब्जर्व किया है कि मम्मा तपन अंकल और तुम सब के साथ बहुत रिलैक्स्ड रहती हैं और यहां तुम सब के सामने  मुझ पर भी बहुत कम चिल्लाती  हैं. घर पर तो हरदम किसी न किसी बात को ले कर झींकतीझल्लाती  रहती हैं.  उन का ब्लडप्रैशर भी हरदम हाई रहता है. लेकिन  तुम सब के साथ रहने से एकदम नौर्मल आ जाता है. तुम लोगों के यहां वे बेहद  खुश भी दिखती हैं. इन दोनों की जल्दी से जल्दी शादी करवाना बेस्ट आइडिया है. लेकिन, यह तो हमारी सोच है.  खुद उन दोनों को  शादी के लिए तैयार कौन करेगा? मुझे नहीं लगता मम्मा या तपन अंकल इस के लिए आसानी से हां कर देंगे.”

“हां, आसानी से तो राजी नहीं होंगे लेकिन इस के लिए हमें कुछ करना होगा. चलो, अब इस प्लान को ऐक्शन में बदलने का समय आ गया है.”

उस दिन सुबहसवेरे तपन इनाया और दादादादी चाय की चुस्कियां ले रहे थे, कि रिदान, रुद्र  और अमायरा वहां आ गए और सब से  पहले रिदान  ने  बात छेड़ी, “पापा, आंटी, हम तीनों और दादूदादी ने एक डिसीज़न लिया है और आप दोनों को यह मानना ही पड़ेगा.”

“डिसीज़न, कैसा डिसीज़न भई?  हमें भी तो बताओ, हमारे होते हुए तुम लोगों को  डिसीज़न लेने की क्या जरूरत आन पड़ी, बरखुरदार?”

इस पर इस बार रुद्र बोला, “हमने डिसाइड किया है कि इनाया आंटी हमारी मम्मा बनेंगी और आप अमायरा के पापा?”

तभी रिदान बोल पड़ा, “हम तीनों और दादूदादी ने आप दोनों की शादी करवाने का डिसीज़न लिया है.”

इस पर इनाया बुरी तरह चिंहुक कर लगभग उछलते हुए बोली, “यह कैसा बेहूदा मज़ाक है रिदान?

मेरी  और तपन की  शादी? पागल तो नहीं हो गए हो  तुम तीनों. यह कैसी ऊलजलूल बातें कर रहे हो? अमायरा चलो, हम घर चल रहे हैं. तुम बच्चों की अक्ल तो घास चरने चली गई है.”

“नहीं मम्मा, मैं यहां से कहीं नहीं जा रही, न ही मैं अभी आप को यहां से कहीं जाने दूंगी. घर पर आप बेहद डिप्रैस्ड रहती हो. हंसना तो जैसे भूल ही जाती हो. आप को हरदम कहीं न कहीं  दर्द होता  रहता है. लेकिन यहां सब के साथ आप बहुत खुश रहती हो. मेरा भी यही मानना है कि आप दोनों को शादी कर लेनी चाहिए.”

“व्हाट नौनसैंस,  तुम बच्चे जो मुंह में आए बोलते जा रहे हो. मैं जा रही हूं यहां से,” इनाया ने घोर  आवेश में वहां से उठते हुए कहा.

इस पर दादू ने धीरगंभीर स्वरों में उस से  कहा, “इनाया बेटा, बैठ जाओ प्लीज़, और मेरी बात सुनो. हम दोनों की भी यही  इच्छा है कि तुम दोनों एक हो जाओ. यह जिंदगी एक बार ही मिलती है और इसे हर हाल में खुशीखुशी बिताना हमारी मौरल  ड्यूटी बनती है.  तुम दोनों के शादी करने से 2 घर बस जाएंगे, बेटा. रिदान, रुद्र  को मां मिल जाएगी और अमायरा को पिता. अपनी नहीं तो इन बच्चों की तो सोचो, बेटा. तुम दोनों के इन की जिंदगी में आने से इन की जिंदगी का अधूरापन खत्म हो जाएगा.  प्लीज़  बेटा, मान जाओ.”

ये बातें सुन तपन तो मौन हो गया  लेकिन इनाया की आंखों से आंसू बहने लगे. वह बोली, “अंकल, इस  भरी दुनिया में तपन और आप लोग ही तो मेरे अपने हैं.  प्लीज़ अंकल, तपन से  शादी करने की मैं सोच भी नहीं सकती.  वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और ताज़िंदगी रहेगा.  उस से शादी कर के मैं इस खूबसूरत रिश्ते को हमेशा के लिए नहीं खोना चाहती. फिर  अब मेरी  क्या उम्र है  शादी की, दुनिया क्या कहेगी? लोग तरहतरह की बातें बनाएंगे. मुझ पर  और अमायरा पर तंज़  कसेंगे.  रुद्र  और रिदान को भी सब के ताने सुनने पड़ेंगे. नहींनहीं, मेरी खातिर इन बच्चों को कुछ सुनना पड़े, यह मुझे गवारा नहीं. फिर हम दोनों के धर्म भी जुदा हैं.   मैं मुसलमान, आप लोग हिंदू. नहींनहीं, यह आइडिया कतई प्रैक्टिकल नहीं. यह नामुमकिन  है.”

इस बार  दादी उस के पास आईं  और उस के आंसू पोंछते  हुए उस के दोनों हाथ थाम उस से स्नेहविगलित  स्वरों में बोलीं, “इनाया, मनों का मेल किसी भी शादी की पहली शर्त होती है. तुम दोनों के मन मिले हुए हैं.  बस, इस से ज्यादा और क्या चाहिए? दिलों  के मेल के सामने धर्म, जाति और बिरादरी कुछ माने नहीं रखतीं. मेरी बात गांठ बांध ले, बेटा, इस शादी से तुम दोनों बहुत खुश रहोगे. तुम दोनों शादी कर रहे हो, आखिर इस में गलत क्या है? दुनिया की क्या परवा करनी?  उस का तो काम ही कुछ न कुछ कहना होता है.”

शादी के बाद इनाया के तपन के घर में हमेशा के लिए आ जाने के बाद घर का माहौल बेहद खुशगवार हो चला था.
इस बार दादी की बात पर इनाया सोचमग्न हो गई, कुछ नहीं बोली. अब रिदान  चिल्लाया, “तो दादी, अब पापा और इनाया आंटी की शादी पक्की. इस पर तीनों बच्चे खुशी से झूमते हुए चिल्लाए,  “थ्री चीयर्स टू मम्मा एंड पापा,” और तीनों ने एकदूसरे को हग कर लिया.

दिन बीत रहे थे. लेकिन इनाया के मन में इस विवाह को ले कर जबरदस्त कशमकश चल रही थी.

उस ने कई बार इस  विवाह को ले कर अपनी आशंकाएं जाहिर करने की कोशिश की, लेकिन तीनों बच्चे और तपन के मातापिता उसे कुछ कह पाने का मौका ही न देते.

तपन के मन में भी इस शादी को ले कर बहुत  दुविधाएं थीं, लेकिन इस संबंध  के लिए मातापिता और दोनों बच्चों के बेशर्त समर्थन की वजह से वह  उन से मुक्त हो गया. अलबत्ता, इनाया के मन में इस रिश्ते  को ले कर आखिर तक हिचकिचाहट थी. वह अभी तक अपने मन को इस बंधन के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं कर पाई थी. उसे लग रहा था कि हिंदू समाज उसे अपने समाज में खुले दिल से नहीं अपनाएगा, जिस से उस की मानसिक शांति के साथसाथ उस की बेटी के मन की शांति भी भंग हो सकती है.

उस की यह उलझन भांप कर एक दिन तपन ने उस से एकांत में दोनों के विवाह की चर्चा छेड़ी.

“इनाया, क्या तुम मुझे हस्बैंड के तौर पर  अपनी ज़िंदगी में शामिल करने के लिए पूरे मन से तैयार हो? यह शादी तभी होगी अगर तुम्हें इसे ले कर कोई गंभीर औब्जेक्शन न होगा.”

तपन की इस बात पर वह बोली, “तुम मेरे बेस्ट फ्रैंड हो. मैं निश्चित हूं कि तुम्हारे साथ ज़िंदगी का एकएक लमहा  गुज़ारना मेरे ज़िंदगी को बेहद खूबसूरत बना देगा. डरती हूं तो बस इस दुनिया से और अपने धर्मों के अलग होने से. कहीं इन की वजह से हम दोनों और हमारे बच्चों की ज़िंदगी में जहर न घुल जाए.”

“नहींनहीं इनाया, निश्चिंत रहो. ऐसा कुछ नहीं होगा. मां और पापा हमारे साथ हैं, हमारे बच्चे हमारे साथ हैं, तो हम दोनों को बाकी  फुज़ूल की बातों को ले कर डरने की बिलकुल जरूरत नहीं. मौनी के जाने के बाद बहुत अकेलापन महसूस करने लगा हूं. मेरा हाथ थाम लो, बस. वादा करता हूं, तुम्हें अपने डिसीजन पर पछतावे का  मौका कभी नहीं दूंगा,” यह कहते हुए तपन ने अपना हाथ इनाया की ओर बढ़ाया. नम हो आई आंखों से इनाया ने उस के हाथ में अपना हाथ दे दिया. तपन ने हौले से उस की हथेली चूम ली.

इनाया की इस मौन स्वीकृति के बाद उन दोनों के विवाह में कोई अड़चन शेष न रही थी. रिदान, रुद्र और  अमायरा ने तपन, इनाया और दादूदादी से सलाह  कर एक रविवार को उन की कोर्टमैरिज तय कर दी.

इधर तीनों बच्चे अपने अपने पेरैट्स के एक नए रिश्ते में बंधने  के ख़याल से बेहद उत्साहित व मगन थे.

दिन बीत रहे थे और आज उन दोनों की कोर्टमैरिज  का बहुप्रतीक्षित दिन आ पहुंचा.

इनाया  और तपन 2 हस्ताक्षरों  के साथ  जन्मजन्म के पवित्र बंधन में बंध गए.

शादी के बाद इनाया के तपन के घर में हमेशा के लिए आ जाने के बाद घर का माहौल बेहद खुशगवार हो चला था.

तपन और इनाया के विवाह को 5-6  माह होने आए, लेकिन इनाया  अभी तक पहले की तरह तपन के  घर के नए बने पोर्शन में रह रही थी और तपन अपने बैडरूम में.

दिन यों ही गुज़रते जा रहे थे कि तभी अमायरा का जन्मदिन पड़ा. रिदान और रुद्र ने उस के जन्मदिन को खास  बनाने के लिए  अमायरा की करीबी  सहेलियों और अपने कौमन दोस्तों के लिए एक बढ़िया पार्टी आयोजित की.

उस के जन्मदिन के फौरन बाद वर्ष 2005 की तरह ईद और दिवाली एक ही सप्ताह में पड़े थे. दोनों पर्वों  के एक ही सप्ताह में पड़ने से दोनों परिवारों की खुशियां  दुगनी हो चली थीं.

इनाया हर वर्ष ईद के दिन शाम को अपने दोस्तों के लिए शानदार पार्टी आयोजित करती थी. तपन ने अपने घर में इनाया की पहली ईद को यादगार बनाने के लिए शाम को अपने घर पर एक जबरदस्त  पार्टी आयोजित की.

ईद वाले दिन तपन, रिदान  और रुद्र तीनों नहाधो कर धवल कुरतेपजामे में सजधज तैयार हो गए. तपन और उस के मातापिता ने इनाया, अमायरा, रिदान और रुद्र सभी को बढ़िया ईदी दी. घरभर में उत्सव की चहलपहल थी.

इनाया तपन  और उस के पूरे परिवार के इस सहयोगपूर्ण और केयरिंग रवैए  से अभिभूत थी.

कदमकदम पर पूरे परिवार का हर सदस्य उसे यह एहसास दिला  रहा था कि वह हर चीज में उस के साथ है और वह उन से कतई अलग नहीं है.

दिन यों ही हंसीखुशी बीत रहे थे. उन सब के जीवन में थोड़ीबहुत कड़वाहट थी तो दोनों तरफ़ के कुछ करीबी रिश्तेदारों की वजह से जो शुरू से इस अंतरधार्मिक विवाह के पूरी तरह से खिलाफ़ थे. कभीकभी इनाया, तपन और तीनों बच्चों के कानों में उन के मातापिता के बड़ी उम्र में विधर्मी से विवाह करने की प्रतिक्रियास्वरूप कटु ताने और व्यंग्यबाण पड़ जाते, लेकिन उन सब के मध्य इतनी गहरी बौन्डिंग थी कि उन से उन सब को कोई फ़र्क न पड़ता.

तभी उसी सप्ताह दिवाली आ गई. इनाया और अमायरा दिवाली मनाने को ले कर रिदान और रुद्र की तरह बेहद उत्साहित थे.

दिवाली की सुबह तपन मातापिता के साथ चाय पी रहा था कि तभी वह इनाया को सुर्ख लाल साड़ी, गहने,  मांग में दप दप  करते सिंदूर और माथे पर एक बड़ी सी बिंदी में सजीधजी देख कर मंदमंद मुसकरा उठा.

इनाया  को पूरे मन से दिवाली मनाने के मूड में देख कर घरभर  में खुशी की लहर छा गई.  रात को इनाया ने पूरे उत्साह, उमंग के साथ तपन और बच्चों के साथ ख़ुशी मनाई और फिर सासससुर के पैर छू कर उन का आशीर्वाद लिया.

सब ने देररात तक आतिशबाजी का लुत्फ़ उठाया.

देररात बच्चे अपनेअपने कमरों में सोने जा चुके थे.  दादीदादू पहले ही सो  चुके थे. इनाया  घर समेट अपने कमरे में जाने ही वाली थी कि तभी तपन उस के पास आया और बोला, “इनाया, आज मैं बहुत खुश हूं.  मुझे तुम्हें दिवाली गिफ्ट देना है.  जरा चलो तो मेरे रूम में.”

इनाया के कंधों को हौले से थाम वह उसे अपने रूम में ले गया. उस ने उसे अपने बैड पर बिठाते हुए एक बेहद खूबसूरत, बड़े से हीरे की अंगूठी उस की रिंग फिंगर में पहना दी और फिर उस के हाथ थाम उस की हथेली पर एक मयूरपंखी स्नेहचिह्न जड़ आद्र स्वरों  में उस से  कहा, “इनाया,  कब तक मुझ से यों दूरदूर रहोगी? मुझे अब  तुम से यह दूरी सही नहीं जाती,” यह कहते हुए  उस ने  उसे अपनी बांहों में बांध लिया.

दोनों की वह अरमानोंभरी रात आंखों ही आंखों में बीत गई.

2 दिलों के मधुर मिलन की यह अनोखी दास्तान अपने मुकाम तक पहुंच गई.

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