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अप्रैल में मई की गर्मी जनजीवन प्रभावित, सब्जी उत्पादकों की सिचाई करते-करते हालत खराब

मुल्क तक न्यूज़ टीम, मऊ. Mau Mausam Samachar: कुदरत कब अपना रंग बदल कर मुसीबत बन जाए, इसे समझ पाने में बड़े-बड़े मौसम विज्ञानी भी चकमा खा जाते हैं। अप्रैल का पहला ही सप्ताह चल रहा है, लेकिन हर इलाके में गर्मी का अहसास मई से कम नहीं है। पछुआ हवाएं कुछ कदम चलते ही शरीर झुलसाने लगी हैं। भीड़ वाले स्थानों पर गर्मी से लोगों के गश्त खाकर गिरने का सिलसिला तेज होने लगा है। जरा सी खान-पान की असावधानी होते ही सेहत बिगड़ते देर नहीं लग रही है। धूप में बच्चों की गतिविधियों को लेकर अभिभावकों की निगरानी बढ़ गई है।
खेतों में गेहूं की कटाई और मड़ाई का सिलसिला तेज हो गया है। गेहूं की फसल खेतों में पक कर जरा सी चूक होते ही आग का शिकार होने लगी है। जल्दी मड़ाई को लेकर किसानों की चिता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। एक साथ फसल के तैयार हो जाने के चलते किसी को कंबाइन नहीं मिल पा रही है तो किसी को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। सब्जी उत्पादक किसानों की मुश्किल यह है कि शाम को खेत में पानी चला रहे हैं और दूसरे दिन ही पानी सूख जा रहा है। इससे किसानों को भिडी, बैगन, लौकी, कद्दू, खीरा, हरी मिर्च, धनियां, पत्तागोभी आदि हरी सब्जियों के खेतों में ज्यादा से ज्यादा सिचाई करनी पड़ रही है। ऐसा न करने पर फूल लेकर फल देने वाली सब्जियों के फूल झड़ने लग रहे हैं।



खुले आसमान के नीचे खड़ी बसों में बैठना मुश्किल

चालू माह में ही मई और जून की तरह पड़ रही गर्मी का सबसे अधिक दंड यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे खड़ी बसों और मैजिक आदि वाहनों पर बैठना मुश्किल हो गया है। सड़कों पर जैसे-तैसे सिर को गमछे या दुपट्टे से ढककर लोग आना-जाना कर ले रहे हैं, लेकिन वाहनों में उबल कर रह जा रहे हैं।


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