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मऊ सदर चौक की RSS की होली, छोटे-बड़ों का किया जाता है पूरा सम्मान

मुल्क तक न्यूज़ टीम, मऊ. (Mau News) मऊ जिले के सदर चौक पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की होली बड़े ही परंपरागत तरीके से मनाई जाती है। सदर चौक पर होली के दिन 1 घंटे तक होली खेलने की परंपरा है। यहां की खासियत यह है कि सभी युवा और बड़े जो भी हो वह सुबह सवेरे अपने घरों से रंग गुलाल ढोल मजीरे ताशे के साथ होली खेलने निकलते हैं । दिन में 12 बजे तक मऊ के सदर चौक पर पहुंचकर होली के परम्परागत कार्यक्रम में सम्मिलित होते हैं, इसके बाद सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में जाकर होली खेलते हैं।

परंपरागत होली वर्षों से चली आ रही

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक राजीव नयन जी का कहना है कि यहां की परंपरागत होली वर्षों से चली आ रही है और इसका नेतृत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इकाई द्वारा किया जाता है यहां पर ध्वज लगाने के पश्चात प्रार्थना होता है फिर रंगो भरी होली होती है उन्होंने कहा कि होली हमारे जीवन के एक विशेष पर्व के रूप में होता है जहां पर हर छोटा बड़ा व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति धर्म का हो सभी एक साथ मिलकर मनाते हैं और एक दूसरे से गले मिलते हैं आज का दिन हर आदमी को बराबर कर देता है होली का त्यौहार हमारे जीवन में एक नई उमंग का संचार करता है जोकि हमें इस जीवन को जीने की राह दिखाता है।

मऊ जिले का एकमात्र मुख्य बाजार हुआ करता था

शहर के व्यवसाई युवा प्रशांत रत्नम का कहना है कि उन्हें उनके बाबा ने बताया था कि यहां की होली सदर चौक जोकि मऊ जिले का एकमात्र मुख्य बाजार हुआ करता था और यह बीचो-बीच शहर में होने के कारण काफी प्रसिद्ध जगह हुआ करता था, तो यहां के स्वर्णकार किराना व्यवसाई कपड़ा व्यवसाय सूत व्यवसाय और अन्य सभी व्यवसाय करने वाले लोग अपने अपने मोहल्लों से होली खेलते हुए यहां पर एकत्रित होते थे और फिर एक दूसरे के साथ रंगो भरी होली खेलने के पश्चात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के द्वारा भगवा ध्वज फहरा कर प्रार्थना करने के पश्चात चौकी होली शुरू होती है, और लोग रंग अबीर गुलाल खेलते हुए अपने अपने घरों को चले जाते या नदियों और जल कुंडो पर जाकर नहाने का कार्य करने के साथ शाम के अबीर गुलाल होली मिलन के तैयारी में लग जाते थे।प्रशांत ने आगे बताया कि हम लोग आज भी अपनी पुरानी जो चली आ रही परंपरा चली आ रही है, उसका पूरी निष्ठा पूर्वक निर्वहन करते हुए चलते हैं और इसमें सभी छोटे-बड़ों का पूरा सम्मान किया जाता है।

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