Breaking News

जीतन राम मांझी के विवादित बोल: हिंदू धर्म को बताया खराब, सत्‍यनारायण पूजा का भी किया विरोध

मुल्क तक न्यूज़ टीम, पटना. हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा के अध्‍यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी ने फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्‍होंने हिंदु धर्म को खराब बताया है। साथ ही सत्‍यनारायण पूजा पर सवाल उठाए हैं। मांझी ने यह विवादित बयान एक कार्यक्रम के दौरान दिया। इस बयान के वायरल होने के बाद अब मांझी ने ट्वीट कर अपनी सफाई भी दी है। विदित हो कि मांझी इसके पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं। हाल ही में उन्‍होंने शराबबंदी की समीक्षा की मांग करते हुए यहां तक कह दिया था कि बिहार में मंत्री व अधिकारी रात 10 बजे के बाद शराब पीते हैं।

मांझी ने खड़ा किया सत्‍यनारायण पूजा पर विवाद

अपने बयानों के लेकर विवादों में रहे जीतन राम मांझी ने फिर नया विवाद खड़ा किया है। मुसर भुइयां समाज की सभा में उनके दिए बयान का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वे गाली देते हुए कह रहे हैं कि अब हर जगह हमलोग के टोला में भी सत्यनारायण भगवान की पूजा हो रही है। और पंडित .... (अपशब्द) आते हैं और कहते हैं हम नहीं खाएंगे बाबू, नगद ही दे दीजिए। कहा कि पहले गरीबों के बीच यह पूजा देखने को नहीं मिलती थी, लेकिन आजकल यह खूब हो रही है। बाबा साहेब अंबेडकर का हवाला देते हुए मांझी ने कहा कि साल 1956 में जीवन के अंतिम दौर में उन्‍होंने हिंदु धर्म को खराब बताया था। उनका निधन बौद्ध होकर ही हुआ था। मांझी ने ब्राह्मणों के लिए भी आपत्तिजनक बातें कहीं।

विवाद गहराया तो अब ट्वीट कर दी सफाई

इस बयान का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद गहरा गया है। इसके बाद मांझी ने अपनी सफाइ में ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्‍होंने कहा है कि ब्राह्मणों को लेकर उनके वीडियो के उतने ही अंश को वायरल किया जा रहा है, जिससे विवाद उत्पन्न हो। बयान का पूरा सच जानने के लिए उसे पूरा सुनने की जरूरत है। उन्‍होंने आगे कहा है कि उनके दिल में समाज के हर तबके के लिए उतनी ही इज्जत है जितना वे अपने परिवार की करते हैं। कहा कि उन्होंने पंडित जी को नहीं, अपने समाज के लोगों को गाली दी थी। अगर गलतफहमी हो गई हो तो वे माफी चाहते हैं।

क्‍यों दिया बयान, पूछने पर बताई ये बात

अपने समाज के लोगों को गाली क्यों दी, इस सवाल पर मांझी ने कहा कि पहले पिछड़ी जाति के लोग पूजा-पाठ में उतना विश्वास नहीं करते थे। अपने देवता का पूजा करते थे। तुलसी जी हों या मां शबरी हों, मगर अब तो पंडित जी भी आते हैं और कहते हैं कि बाबू तुम्हारे यहां खाएंगे नहीं, नगद ही दे देना। इस पर शर्म आनी चाहिए।

पूजा-पाठ नहीं करते, इसके पीछे यह कहानी

जीतन राम मांझी ने कहा कि वे पूजा-पाठ कभी नहीं करते। इसके पीछे भी कहानी है। वे सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। मंदिर में श्रावणी पूजा होती थी। वे मंदिर गए तो उनके दोस्त तो अंदर चले गण्‍, लेकिन उन्‍हें बांह पकड़कर निकाल दिया गया। उस दिन से वे समझ गए कि ... देवी-देवता हमारे नहीं, सब ई लोग के हैं। उस दिन से पूजा-पाठ नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि हम जय भीम का नारा लगाते हैं तो अंबेडकर के सिद्धांत को मानना चाहिए। आज आस्था के नाम पर करोड़ों-करोड़ रुपये लुटाए जा रहे हैं, लेकिन गरीब की जो भलाई होनी चाहिए, उतनी भलाई नहीं हो रही है।

अब बयान के निकाले जा रहे हैं राजनीतिक अर्थ

जीतन राम मांझी के इस बयान के अब राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में ब्राह्मणों काे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वोट बैंक माना जाता है। एनडीए में रहते हुए मांझी के इस बयान पर राजनीति गरमानी तय है।

'मंत्री-अफसर रात 10 बजे के बाद पीते हैं शराब'

जीतन राम मांझी ने हाल ही में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी के लेकर भी विवादित बयान दिया था। उन्‍होंने शराबबंदी की समीक्षा की बात करते हुए यह भी कह दिया था कि बिहार में नेता-मंत्री व अधिकारी रात 10 बजे के बाद शराब पीते हैं। मांझी ने आम लोगों से भी रात 10 बजे के बाद शराब पीने की बात कही थी। हालांकि, बाद में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी की समीक्षा से इनकार करते हुए और सख्‍ती बढ़ाने की बात करते हुए सरकार का स्‍टैंड स्‍पष्‍ट कर दिया।

कोई टिप्पणी नहीं