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बिहार से बंगाल तक सियासी बवंडर, राज्यों में सियासी तूफान से बदलेंगे कई समीकरण!

मुल्क तक न्यूज़ टीम, नई दिल्ली. नौ बड़े राज्यों में जारी सियासी हलचलें क्षेत्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों तक सीमित रहेंगी या फिर यह राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकती हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के दूरगामी असर से राष्ट्रीय राजनीति भी अछूती नहीं रह सकती है। दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनावों से उठा राजनीतिक बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां घरवापसी की राजनीति तेज है, वहीं बंगाल के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उथल-पुथल मचाई और भाजपा नेतृत्व अगले साल हेने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति मजबूत करने में जुट गया। लेकिन, यूपी में हलचल सिर्फ भाजपा तक सीमित नहीं हैं। कांग्रेस, बसपा और सपा में भी अलग-अलग मोर्चों पर हलचल है।

पायलट-गहलोत का मुद्दा फिर गरम

बंगाल से उत्तर प्रदेश में हुई राजनीतिक हलचल ने राजस्थान में पायलट-गहलोत के मुद्दे को फिर गर्मा दिया। दरअसल, जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने से असंतुष्ट कांग्रेस नेता सचिन पायलट फिर आक्रामक भूमिका में आ गए। इस बीच बससा से कांग्रेस में आए विधायक भी सरकार पर हावी हो रहे हैं। उधर, पंजाब में कैप्टन-सिद्ध विवाद का समाधान निकला भी नहीं कि अकाली-बसपा गठजोड़ ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी।


बिहार में लोजपा में संकट

यह सब चल ही रहा था कि बिहार में लोजपा में पांच सांसदों ने अलग गुट बनाकर चिराग पासवान के लिए संकट पैदा कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम में परदे के पीछे जदयू की सक्रियता से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। चिराग पासवान के अगले कदम पर सबकी नजर है।


महाराष्ट्र में गठबंधन खतरे में

उधर, महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना गठबंधन भी खतरे में दिखाई दे रहा है। कांग्रेस लगातार बयानबाजी कर गठबंधन के लिए मुश्किल पैदा कर रही है। दक्षिण राज्य तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक पूर्व नेता शशिकला के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई में जुट गया है। हार के बाद वह केंद्रीय राजनीति में भी हिस्सा चाह रहा है। वहीं, केरल में हाल में हारने के बाद कांग्रेस के कई नेता वरिष्ठ नेता अहम जिम्मेदारियां नहीं मिलने से नाराज हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और उसके बाद गुजरात में चुनाव होने हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी के गुजरात में चुनाव लड़ने के ऐलान को लेकर भी राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन होने लगा है।


राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ये घटनाएं क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित जरूर करेंगी, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति पर तुरंत कोई प्रभाव नहीं दिखता है। लेकिन, दूरगामी असर होगा। इन घटनाओं में अभी भी विपक्ष बिखरा हुआ दिखता है। अपने राज्य में सिर्फ ममता बनर्जी मजबूती के साथ लड़ती नजर आती हैं। जबकि भाजपा पश्चिम बंगाल के नतीजों के बावजूद अपनी रणनीति को चाक-चौबंद बनाने में जुटी हुई है। कांग्रेस अंदरूनी कलह तथा नेतृत्व के संकट से उबर नहीं पा रही है। कुल मिलाकर यह घटनाएं आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के चुनावों पर असर डालेंगी। इनके नतीजे आम चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकते हैं।

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