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पूर्वांचल में फिर तबाही मचाने को आतुर सरयू नदी, बारिश के बाद नदी का बढ़ा जलस्‍तर

मुल्क तक न्यूज़ टीम, मऊ. हर साल प्राकृतिक आपदा से जूझना देवरांचल के लोगों की नियती बन चुकी है। कभी भीषण बाढ़ तो कभी भयंकर सूखा तो कभी अगलगी की घटनाएं। पूरा साल ही इन लोगों का संघर्ष के बीच ही गुजरता है। इन दिनों यह क्षेत्र एक बार फिर सरयू नदी की कटान का दंश झेलने के कगार पर है क्योंकि पिछले दो सप्ताह से शुरू हुई कटान में तेजी आ गई है। नदी के सबसे अंतिम छोर पर बसे विनटोलिया गांव का अस्तित्व खतरे में है क्योंकि नदी अब घरों के मुहाने तक पहुंच चुकी है। कटान से लोगों के खेती योग्य भूमि सहित रिहाइशी मकान भी नदी में विलीन हो रहे हैं। हालांकि इस क्षेत्र में नदी की कटान कोई नई बात नहीं है। पिछले कई सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है और यही वजह है कि चार साल पूर्व तक बिनटोलिया गांव से लगभग चार किमी दूर नदी अब गांव तक पहुंच चुकी है।

यहां सरयू नदी के कहर का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ साल पहले तक मौजूद केवट टोलिया, पंचपड़वा, बिनटोलिया बलुआ जैसे पुरवे पूरी तरह नदी में विलीन हो कर अपना वजूद खो चुके हैं। आज यह तीनों पुरवे तहसील के नक़्शे पर तो मौजूद हैं मगर धरती पर इनका कोई वजूद नहीं है। नौ बड़ी ग्रामसभाएं एंव 50 से अधिक छोटे बड़े पुरवों पर खड़ा देवरांचल का यह इलाका शुरू से ही प्रशासनिक उदासीनता का शिकार रहा है। हर साल बरसात के दिनों में नदी कटती रही। किसानों के खेत नदी में समाते गए मगर इस कटान को रोकने हेतु कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यहां के लोगों द्वारा बाढ़ से बचाव एंव कटान रोकने हेतु स्थाई ठोकर निर्माण की मांग पिछले कई सालों से चली आ रही है जो अब तक पूरी नहीं हुई।


नदी की धारा को मोड़ने का चल रहा प्रयास

वर्तमान में यहां सरयू नदी में सेक्शन मशीन के सहारे बालू निकाल कर नदी की धारा को मोड़ने का कम चल रहा है जिसका समय सीमा 30 जून तक ही है। अभी लगभग तीन किमी का काम होना है और नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या समय रहते नदी की धारा मोड़ने की कवायद पूरी हो पाएगी।


प्रशासन रख रहा नजर

कटान से सबसे अधिक प्रभावित बिनटोलिया गांव पर तहसील प्रशासन सहित जिला प्रशासन की भी नजर है। एक सप्ताह पूर्व खुद जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल ने स्थलीय निरीक्षण किया था और कार्यदायी संस्था को तेजी से कार्य कराने को निर्देशित किया था। ताकि नदी का पानी बढ़ने से पहले कम पूरा हो जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या हर साल की कटान की इस समस्या का स्थाई समाधान निकल आएगा।

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