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भारत-चीन के बीच तनाव में कमी के लिए अहम है पैंगोंग का फिंगर एरिया

भारत और चीन की सेना के बीच पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी स्थानों से 'हटने पर परस्पर सहमति' बन गई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति सोमवार को हुई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बैठक में बनी। हालांकि, चीन पर करीबी से नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव में कमी तभी आएगी, जब लद्दाख की पैंगोंग सो लेक पर पहले वाली यथास्थिति वापस लागू होती है। इसके बाद ही बातचीत को सफल माना जाएगा।

इन मामलों की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) ने फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक, बंकर, पिलबॉक्सेस और ऑब्जर्वेशन पोस्ट्स बना लिए हैं। उन्हें वापस वहां से हटाना और पीछे करना काफी मुश्किल भरा काम होने जा रहा है।

मई के शुरुआत में, जब चीनी सैनिकों ने फिंगर 4 वाली जगह पर कब्जा नहीं किया था, तब भारतीय सैनिक फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करते थे। सरकार भी इस पूरे इलाके को भारतीय सीमा के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र मानती आई है। अब वहां पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी की वजह से भारतीय सैनिकों की पेट्रोलिंग पर असर पड़ सकता है। फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 के बीच में आठ किलोमीटर की दूरी है। कई सैटेलाइट तस्वीरों से साफ होता है कि 5-6 मई के बाद उत्पन्न हुए तनाव के बीच यह मौजूदा स्थितियां सामने आई हैं।

इस क्षेत्र में भारत का दावा है कि उसका इलाका फिंगर 8 तक है, वहीं चीन फिंगर 4 तक दावा करता है। वहां तक पीएलए ने वाहनों के आवाजाही के लिए सड़क का निर्माण किया है। उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी.एस. हुड्डा कहते हैं कि पीएलए को फिंगर 4 से फिंगर 8 तक वापस ले जाना एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने वहां जो भी बिल्डअप्स बनाए हैं, उससे नहीं लगता है कि उनका इरादा पीछे हटने का है।

फिंगर एरिया एकमात्र ऐसा इलाका था, जहां भारत-चीन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बातचीत में तनाव कम करने के फैसले के बाद भी पीछे हटने की प्रक्रिया नहीं शुरू हुई थी। यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच हफ्तों से चल रहे सीमा गतिरोध का केंद्र रहा है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में गहरा असर पड़ा है।

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