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कानपुर शेल्टर होम केस : बालगृह में छह गर्भवती संवासिनियों की उम्र 18 साल से कम

कानपुर. कानपुर के स्वरूपनगर स्थित राजकीय बालगृह (बालिका) में सात संवासिनियों के गर्भवती होने का मामला तूल पकड़ गया है। प्रशासन की ओर से की गई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां रह रहीं 171 में से सात गर्भवती और 57 कोरोना संक्रमित निकली हैं। अहम बात है कि इनमें से एक को छोड़कर बाकी की उम्र 18 साल से कम है। एसपी पश्चिम के मुताबिक गर्भवती सात किशोरियों में से पांच को घर वालों ने ठुकरा दिया था तो दो ने घर जाने से ही इनकार कर दिया था, ऐसे में सभी को बालिका गृह भेज दिया गया था। पूरे मामले की रिपोर्ट मीडिया के साथ शासन को भी भेज दी गई है।
प्रशासन के रिकॉर्ड के मुताबिक बालिका गृह लाने से पहले सभी गर्भवती थीं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां दाखिल कराने से पहले पुलिस ने इनका मेडिकल कराया था। रिपोर्ट में ये गर्भवती थीं। यह भी दावा किया गया कि किशोरियों को भी प्रेग्नेंसी का पता था। पुलिस अब यह तथ्य का पता लगा रही है कि बालिका गृह लाए जाने के पहले से किशोरियां कितने माह के गर्भ से थीं। रिकॉर्ड रूम से मेडिकल रिपोर्ट तलब की गई है। मामले ने तूल तब पकड़ा जब संवासिनी गृह में कोरोना पॉजिटिव की संख्या तेजी से बढ़ी। एक के संक्रमित मिलने के बाद जब सभी के सैंपल लिए गए तो 57 संवासिनियां वायरस संक्रमण की चपेट में आ चुकी थीं। सात गर्भवती में पांच पॉजिटिव तो दो की रिपोर्ट निगेटिव आई है। आठ माह की गर्भवती दो किशोरियों को हैलट तो तीन को रामा कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

5 गर्भवती ने कोर्ट में कहा था, घर नहीं जाना चाहते
पुलिस के मुताबिक पांच गर्भवती किशोरियां ऐसी थीं जो अपने पुरुष मित्र के साथ ही रहना चाहती हैं। उन्होंने कोर्ट में परिजनों के साथ जाने से इनकार कर दिया तो बालिका गृह भेज दिया गया। दो मामलों में परिजनों ने अदालत के सामने कह दिया था कि उनका बेटियों से कोई वास्ता नहीं है। इस कारण उन्हें संवासिनी गृह भेजना पड़ा।

पाक्सो एक्ट में दर्ज हैं मामले 
सातों गर्भवती संवासिनियों के मामले में बहला-फुसलाकर भगा ले जाना, रेप, छेड़छाड़ और पाक्सो एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज है। उसके बाद उन्हें कोर्ट या बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने प्रस्तुत किया गया। वहां से राजकीय बालिका गृह भेजा गया। एसपी के मुताबिक पांच मामलों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी, जबकि दो की विवेचना चल रही है।

यहां आने से पहले हो गई गर्भवती 
जिला प्रोबेशन अधिकारी अजित कुमार का कहना है कि सातों पहले से गर्भवती थीं। इस बात की जानकारी थी और उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी मौजूद है। इसे अधिकारियों को सौंप दिया गया है। एसपी पश्चिम अनिल कुमार ने बताया कि दो किशोरियों के बारे में यह तय हो चुका है कि वह दाखिल होने से पहले गर्भवती थीं। बाकी पांच की प्रोबेशन अधिकारी से मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई है। 

डाटा मिलने में हो रही दिक्कत
एसपी ने बताया कि संवासिनी गृह को सील कर दिया गया है। बालिका गृह में उपलब्ध रिकॉर्ड भी सील हैं। यहां के कर्मचारी क्वारंटीन किए गए हैं। ऐसे में पूरा रिकॉर्ड मिलने में काफी दिक्कत और देर हो रही है। 

18 साल पूरा करने पर कहीं भी जा सकतीं
जिला प्रोबेशन अधिकारी के मुताबिक बालगृह बालिका में 171 किशोरियां और महिला गृह में 59 महिलाएं रह रही हैं। जब किशोरियां 18 साल की पूरी हो जाती हैं तो उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जाता है। इस दौरान वह बताती हैं कि कहां और किसके पास जाना चाहती हैं। तब कोर्ट के आदेश पर पुलिस अभिरक्षा में उन्हें गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कब दाखिल हुईं संवासिनी गृह में
  • 30 नवम्बर 2019- कानपुर के चौबेपुर से 18 साल की युवती को दाखिल किया गया। यह कोरोना पॉजिटिव पाई निकली, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
  • 3 दिसम्बर 2019- आगरा से 16 साल की किशोरी को दाखिल किया गया। यह पॉजिटिव है, पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
  • 19 दिसम्बर 2019- कन्नौज से 17 साल की किशोरी को दाखिल किया गया। यह संक्रमित है, मुकदमे में विवेचना चल रही है।
  • 23 जनवरी 2020- एटा से 17 साल की किशोरी को दाखिल किया गया। कोरोना संक्रमित है, कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
  • 16 फरवरी 2020- फिरोजाबाद से 16 साल की किशोरी को दाखिल किया गया। यह पॉजिटिव है, कोर्ट में चार्जशीट दाखिल है
  • 23 फरवरी 2020- एटा से 17 साल की किशोरी को यहां लाया गया। इसकी रिपोर्ट निगेटिव है - न्यायालय में चार्जशीट दाखिल है।
  • 09 जून 2020- कानपुर शहर से 15 साल की किशोरी को दाखिल किया गया। इसकी रिपोर्ट भी निगेटिव है, विवेचना चल रही है।

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