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मौसम: 100 दिन नहीं केवल 30 दिन ही सताएगी गर्मी, जानें कारण

नैनीताल. वायुमंडल के मौसम चक्र में इस बार काफी बदलाव सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ग्रीष्मकालीन सत्र के दौरान करीब सौ दिन तक प्रभावी रहने वाली गर्मी पहली बार सिर्फ तीस दिन के लिए आंशिक रूप से प्रभावी होगी। वैज्ञानिकों की मानें तो यह पहला अवसर है जब गर्मी के सीजन के औसतन तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट होगी।

आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान एवं शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह के अनुसार इस वर्ष मौसम में विभिन्न तरह के बदलाव देखने को मिले हैं। जिससे मौसम चक्र परिवर्तित हुआ है। सामान्यत: हर साल अप्रैल माह से गर्मी का प्रभाव शुरू हो जाता है। जोकि अप्रैल, मई, जून यानि तीन महिने तक चरम पर रहता है।

मौसम विज्ञान के अनुमान की यदि बात की जाए तो साल में लगभग सौ दिन पूर्ण रूप से गर्मी पड़ती है। लेकिन इस वर्ष अबतक करीब 40 प्रतिशत गर्मी के दिन निकल चुके हैं। जबकि शेष दिनों में भी तापमान में बढ़ोत्तरी जैसे आसार नहीं दिख रहे। ऐसे में वैज्ञानिकों की मानें तो इस वर्ष एक माह के लिए गर्मी प्रभावी होगी, लेकिन उस दौरान भी गर्मी का अधिक असर देखने को नहीं मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम चक्र में परिवर्तन हुआ है। इसके अलावा पूर्व से ही मानसून 10 से 15 दिन आगे शिफ्ट हुआ है। इस बार लगातार हो रही वर्षा से मानसून की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि गर्मी के दिनों में काफी कमी रहेगी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि लगातार गर्मी पड़ने के आसार भी कम हैं, जबकि बीच-बीच में तापमान अधिक हो सकता है।

प्रदूषण कम होना और वनाग्नि नियंत्रण मुख्य कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम चक्र में हुए परिवर्तन का मुख्य कारण वायुमंडल में प्रदूषण कम होना तथा वनाग्नि पर नियंत्रण है। यही कारण है कि प्रदूषण काफी कम होने के चलते लगातार बारिश भी हो रही है। प्रदूषण कम होने से बादल अधिक तेजी के साथ बनते हैं। जबकि जंगलों में आगजनी नहीं होने से गर्मी का असर कम हो जाता है।

जून पहले सप्ताह में प्री-मानसून की दस्तक
भीषण गर्मी के ग्रीष्मकालीन सत्र के बाद जून पहले सप्ताह में प्री-मानसून दस्तक देता है। इस दौरान कोहरा, बादल और बूंदाबादी का दौर शुरू हो जाता है। जिसके बाद मानसून प्रभावी होता है। हर वर्ष करीब 15 जुलाई के बाद वर्षाकाल शुरू हो जाता है। इस दौरान जमकर बारिश होती है। हालांकि यह भी खास बात है कि इस वर्ष अबतक भी बारिश का सिलसिला जारी है।

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