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आज रात 8 बजे लॉकडाउन 4 का ऐलान करेंगे PM मोदी? भाषण में हो सकती हैं ये चार बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात आठ बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में क्या बोलेंगे, इसको लेकर कयासों का दौर जारी है। हालांकि, कल मुख्यमंत्रियों के साथ पीएम की चली मैराथन बैठक और उसके बाद आए बयानों से साफ है कि लॉकडाउन (Lockdown) से पूरी तरह छूट नहीं मिलने जा रही है पर कुछ रियायतें बढ़ सकती हैं। मोदी ने कहा था, ''भले ही हम लॉकडाउन को धीरे-धेरी हटाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि जब तक हम कोई वैक्‍सीन या समाधान नहीं ढूंढ लेते हैं, तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सोशल डिस्टेंसिंग ही है।" 25 मार्च से जारी 54 दिन का लॉकडाउन 17 मई को समाप्त होने वाला है। 
इससे साफ है कि लॉकडाउन के तीसरे चरण की मियाद 17 मई को खत्म होने के बाद भी लॉकडाउन खत्म नहीं होने जा रहा है, बल्कि कुछ अधिक रियायतों के साथ लॉकडाउन-4 आने की पूरी संभावना है। लॉकडाउन 4 में अधिक रियायत मिलने के संकेत प्रधानमंत्री ने कल ही दे दिए थे। उन्होंने कहा था कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई के साथ कारोबार को भी रफ्तार देना जरूरी है। मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मोदी ने इसके आगे कहा कि धीरे-धीरे कई हिस्सों में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं और आने वाले दिनों में ये और तेज होंगी।

लॉकडाउन का बढ़ना तय है
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की पैरवी करते हुए कहा कि लॉकडान से बाहर निकलने के लिए सावधानीपूर्वक रणनीति बनाई जाए और राज्यों को वित्तीय सहयोग दिया जाए।  तमिलनाडु में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि 31 मई तक ट्रेन सेवाओं की अनुमति न दें। बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कंटेनमेंट जोन को छोड़कर राष्ट्रीय राजधानी में आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी जानी चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि आपात सेवाओं के कर्मचारियों के लिए मुंबई में लोकल ट्रेन सेवाएं शुरू की जाएं। 

लॉकडाउन-4 में रियायतें बढ़ेंगी?
लॉकडाउन को पूरी तरह नहीं हटाने बल्कि प्रतिबंधों में धीरे-धीरे छूट देने का संकेत देते हुए मोदी ने कहा कि उनका दृढ़ मत है कि लॉकडाउन के पहले तीन चरणों में जिन उपायों की जरूरत थी, वे चौथे में जरूरी नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से 15 मई तक व्यापक रणनीति के लिए सुझाव देने को कहा कि वे अपने-अपने राज्यों में लॉकडाउन की व्यवस्था से कैसे निपटना चाहते हैं। इससे इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि लॉकडाउन-4 में राज्यों की राय को काफी अहमियत मिलने वाली है और सरकारों के अपने-अपने राज्यों में लॉकडाउन को लेकर कुछ फैसले करने की छूट भी मिलेगी।

ट्रेन सेवा पूरी तरह से बहाल नहीं होगी
ट्रेनों की बहाली का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक गतिविधि को बढ़ाने के लिए यह जरूरी था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी रूटों पर सेवाएं बहाल नहीं की जाएंगी और सीमित संख्या में ही ट्रेनें चलेंगी। मोदी ने यह भी कहा, ''मेरा दृढ़ मत है कि पहले चरण में जरूरी समझे गए कदमों की दूसरे चरण में जरूरत नहीं रही और इसी तरह तीसरे चरण में जरूरी समझे गये कदमों की चौथे चरण में जरूरत नहीं है।"

राज्यों को अधिक अधिकार?
मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियां को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, ''आप सभी से अनुरोध करता हूं कि 15 मई तक आप बताएं कि आपमें से हरेक अपने-अपने राज्य में लॉकडाउन को कैसे संभालना चाहता है। मैं चाहता हूं कि लॉकडाउन के दौरान और उसमें क्रमिक ढील के बाद चीजों से कैसे निपटेंगे, उसका आप ब्लूप्रिंट बनाएं। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती रियायतों के बाद भी कोविड-19 को गांवों तक फैलने से रोकने की होगी।" प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों के सुझावों के आधार पर ही आगे का रास्ता तय होगा।

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