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लॉकडाउन : सोनू सूद जैसे मशहूर नहीं लेकिन कई हैं असल जिंदगी के हीरो

लखनऊ। हैदराबाद के सॉफ्टवेयर इंजीनियर नवीन ने पहले अपने राज्य में यूपी-बिहार जाने वाले श्रमिकों को हाईवे पर भोजन-पानी बांटना शुरू किया। कुछ और लोग जुड़े तो वहीं विश्राम करने के लिए एक टेंट भी लगवा दिया। इसके बाद व्हाट्सएप गु्रप और अपने 150 मित्रों की मदद से नवीन 50 से अधिक बसें यूपी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा भिजवा चुके हैं। नवीन जैसे ऐसे दर्जनों समाजसेवी हैं जो अभिनेता सोनू सूद की तरह मशहूर नहीं हैं लेकिन उनका योगदान किसी मायने में कम नहीं।
उन्होंने तेलंगाना से 60 मजदूरों को लखनऊ भिजवाया। साथ ही लखनऊ जिला प्रशासन की मदद से इतने ही मजदूरों को तेलंगाना के लिए बस दिलवाई। इसी तरह लखनऊ के गुफरान हैं। वह भी दर्जनों बसों से श्रमिकों को भिजवा चुके हैं। दोस्तों की मदद से आपस में पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। कभी फंड रेजिंग वेबसाइटों का भी सहारा लेते हैं। दिल्ली में फंसे लखनऊ, बलिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर के मजदूरों को घर भिजवाने के लिए बसें चलवाईं। इसके अलावा ग्वालियर और मध्य प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी बसें भिजवाईं। नवीन ओर गुफरान के प्रयास अभी जारी हैं। 

आईएएस की तैयारी कर रहे चन्द्रजीत कुमार गुप्ता दिल्ली में रहते हैं लेकिन ट्विटर पर माइग्रेंट ट्रैवेल सपोर्ट नाम से हैंडल चला रहे हैं। अब तक कितने मजदूरों को घर भिजवाने में मदद की, यह याद भी नहीं। सिलसिला एक परिवार की मदद से शुरू हुआ। लखनऊ की सहज मान ने भी 125 लोगों और प्रशासन की मदद से मजूदरों को घर भिजवाया। 

आश्रय केन्द्रों तक पहुंचा रहे मदद कर रहे
कई लोग हैं जो समय निकालकर फैजाबाद रोड, शहीद पथ समेत प्रमुख हाईवे पर श्रमिकों की मदद कर रहे हैं। पैदल जाने से रोक रहे हैं। उनको आश्रय केन्द्र पहुंचा रहे हैं। इनमें सपोर्ट ग्रुप लखनऊ कोविड 19 के ग्रुप कैप्टन दिनेश चन्द्र, सरिता सिंह समेत कई नाम हैं जो श्रमिकों को उनके जिले तक भिजवाने में मदद कर रहे हैं।

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