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चंदा मांग कर करके ट्रेन का टिकट खरीद रहे मजदूर, रेलवे के गणित ने खाली कर दी प्रवासी मजदूरों की जेब

लखनऊ.  शनिवार को नासिक रोड से प्रवासी श्रमिकों की एक स्पेशल ट्रेन लखनऊ के लिए चलने वाली थी। प्रति श्रमिक किराया था 470 रुपये। नासिक में इसकी भनक कुछ तहसीलदारों और नगर पालिका परिषद कर्मचारियों को हुई तो उन्होंने और मजदूरों ने चंदा करके टिकट खरीदे तो श्रमिकों को गाड़ी में बैठने को मिला। ट्रेनों से आ रहे इन श्रमिकों को देखकर कोई भी भावुक हो सकता है। हताशा और मजबूरी उनकी आंखों में पढ़ी जा सकती है।
एक और उदाहरण
प्रयागराज में बुधवार को गुजरात से तीन और पंजाब से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन पहुंची। गुजरात के वीरमगम से आए प्रदीप व विशाल ने बताया कि उनसे ट्रेन में बैठने से पहले 620 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से भुगतान फार्म भरवाने वाले व्यक्ति ने लिए थे। दैनिक जागरण के पास श्रमिकों के वीडियो हैं जिसमें वे खुद से किराया वसूले जाने का आरोप लगा रहे हैं और यही वह कटु सत्य है जिसे कोई स्वीकारना नहीं चाह रहा। श्रमिकों के टिकट का पैसा रेलवे देगी या राज्य सरकार, इस बहस के बीच श्रमिक जेब से टिकट खरीद रहे हैं। महाराष्ट्र के अकोला से लखनऊ पहुंचे बंजारा परिवार के मुखिया बनारसी से मिलकर आपको लगेगा कि रेलवे और राज्य सरकारों के बीच मजदूर गेंद की तरह उछाले जा रहे हैं। बनारसी को आठ सदस्यों के लिए 4,440 रुपये तहसीलदार को देने पड़े।

उधर रेलवे दावा किए जा रहा है कि श्रमिकों के टिकट का 85 फीसद वह अदा करेगा और 15 प्रतिशत संबंधित राज्य सरकारें। एक मई को रेलवे बोर्ड की निदेशक, पैसेंजर मार्केटिंग शैली श्रीवास्तव ने सभी जोनल रेलवे को एक पत्र भेजा कि राज्य सरकारें श्रमिकों की लिस्ट रेलवे को देंगी जिसके आधार पर वह टिकट छापेगा और कीमत राज्य सरकारों से ली जाएगी। इस फार्मूले के तहत एक्सप्रेस ट्रेन का स्लीपर क्लास किराया, उसके साथ 30 रुपये प्रति श्रमिक सुपरफास्ट चार्ज व 20 रुपये रिजर्वेशन चार्ज तय किया गया। वरिष्ठ नागरिक और छोटे बच्चे की रियायत भी खत्म कर दी गई। पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों का पूरा किराया तय किया गया।

नियमित ट्रेनों से अधिक किराया
आम दिनों में रेलवे अवध एक्सप्रेस का वडोदरा से लखनऊ का स्लीपर क्लास का किराया 535 रुपये लेता है। यदि सुपरफास्ट चार्ज 30 रुपये जोड़ दिया जाए तो भी यह 565 रुपये होगा लेकिन, इस समय वडोदरा से लखनऊ तक के सफर के लिए श्रमिकों से 620 रुपये वसूले जा रहे हैं। नागपुर से लखनऊ तक 974 किलोमीटर की दूरी का चेन्नई-लखनऊ एक्सप्रेस का स्लीपर क्लास का किराया 475 रुपये है लेकिन, श्रमिक स्पेशल का सुपरफास्ट किराया 505 रुपये रखा गया। टिकटों की कालाबाजारी भी हो रही है। श्रमिकों के अनुसार नासिक रोड से 420 रुपये के टिकट के बदले 600 से 700 रुपये वसूले गए। वड़ोदरा से 620 रुपये का टिकट 800 से 900 रुपये में बेचा गया।

रेलवे टिकट नहीं बेच रहा
रेल मंत्रालय, नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक आरडी वाजपेयी ने बताय क‍ि प्रवासी श्रमिकों को रेलवे कोई टिकट नहीं बेच रहा है। रेलवे केवल उन राज्य सरकारों को टिकट सौंप रहा है जिन्होंने अपने यहां से अप्रवासी श्रमिकों को ले जाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की डिमांड की है।  

खिड़की से टिकट बिक्री नहीं
उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल के डीआरएम अमिताभ कहते हैं कि रेलवे जिला प्रशासन की मांग के अनुसार टिकट उपलब्ध करा रहा है। टिकट का भुगतान जिला प्रशासन करता है। खिड़की से टिकट बिक्री की कोई व्यवस्था ही नहीं है।

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