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पूर्वोत्तर के राज्यों में ग्रामीणों की इच्छाशक्ति से हार गया कोरोना वायरस

नई दिल्ली. कोरोना वायरस का खतरा जहां देश के अन्य इलाकों में बढ़ता जा रहा है वहीं, पूर्वोत्तर के छह राज्यों में ग्रामीणों की इच्छाशक्ति के आगे उसे हारना पड़ा। इन राज्यों में गांव के लोगों ने कड़े नियम अपनाकर ऐसा चक्रव्यूह बनाया कि आठ में से छह राज्य कोरोना मुक्त हो चुके हैं।
सिक्किम, नगालैंड में तो एक भी मामला सामने नहीं आया। मणिपुर में दो जबकि अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में एक-एक मामले सामने आए। यहां सभी मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। शनिवार को मिजोरम भी कोरोना मुक्त घोषित हो गया। मेघालय में कुल 13 मामले हैं लेकिन इनमें भी 10 लोग ठीक हो चुके हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक दिन पहले पूर्वोत्तर के स्वास्थ्य मंत्रियों से बातचीत में कहा, यह सुखद है कि पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य ग्रीन जोन में हैं। नगालैंड में नगा होहो, मणिपुर में माइरा पैबिस और असम, त्रिपुरा व सिक्किम में सामाजिक संस्थाओं ने जागरूकता, सरकारी निर्देशों का पालन कराने को टास्क फोर्स का गठन किया। अगरतला में मुक्ति संघ ने भी अभियान चलाया।

भौगोलिक वजह भी : पूर्वोत्तर के राज्यों में मामले कम होने के पीछे प्राकृतिक और भौगोलिक वजह भी मानी जा रही है। इन इलाकों में आना-जाना इतना आसान नहीं है। लॉकडाउन की वजह से बाहरी लोगों का वहां पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया। जो लोग आए, उन्हें अपने-अपने घर में क्वारंटाइन कर दिया गया।

पिछले आठ दिन में केस बढ़े : पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में अब तक कुल 213 मामले सामने आए हैं, इनमें से 50 फीसदी से ज्यादा मामले बीते आठ दिन में आए हैं।

त्रिपुरा में बीएसएफ जवानों में बढ़ा संक्रमण त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव ने 25 अप्रैल को राज्य को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया था। इसके बाद सीमा पर तैनात बीएसएफ के कई जवान कोरोना से संक्रमित पाए गए। इसके बाद से अब तक राज्य में 134 मामले दर्ज किए गए हैं, इनमें से 113 बीएसएफ जवानों से जुड़े हुए हैं। पर यहां ग्रामीण इलाकों में अभी तक कोरोना का असर नहीं है।

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