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स्पर्म में भी कोरोना वायरस पाए जाने का अध्ययन में दावा

नई दिल्ली. संक्रामक महामारी कोविड-19 पर नित नए शोध और अध्ययन सामने आ रहे हैं। अब एक नए शोध के अनुसार पुरुषों के स्पर्म/वीर्य में भी सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस की मौजूदगी पाई गई है। यह अध्ययन चीन के शांगक्यू म्युनिसिपल अस्पताल में भर्ती कोविड-19 रोगियों पर किया गया है।
अध्ययन के निष्कर्ष गुरुवार को जेएएमए (जामा) नेटवर्क ओपन मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। 38 संक्रमित पुरुष मरीजों के सैंपल लेकर जांच की गई थी। इनमें से छह मरीजों के स्पर्म यानी वीर्य में सार्स-सीओवी-2 का संक्रमण मिला है। इससे पहले तक कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस मनुष्यों में नासिका, गले और फेफड़ों तक ही सक्रिय है। यह वायरस मल, लार और मूत्र में भी पाया गया है। एक अन्य शोध में सामने आया है कि लीवर और किडनी तक भी इसकी मौजूदगी और असर पाया गया। 

इससे वैक्सीन खोजकर्ता वैज्ञानिकों की चुनौती और बढ़ गई है। जहां इसके लक्षणों की अभी तक सटीक जानकारी नहीं मिल सकी है, वहीं इसका स्ट्रेन बदलना और शरीर के अन्य अंगों तक प्रसारित होना नई चिंता है। 

शारीरिक संबंध से भी संक्रमण का खतरा :  
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि ये निष्कर्ष प्रारंभिक हैं और बहुत ही कम लोगों पर शोध किया गया है। मुख्यत: संक्रमण श्वसन की बूंदों या नजदीकी संपर्क से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक नजदीकी ज्यादा खतरनाक है। सामान्य व्यक्ति में इसकी आशंका कम है। यह भी देखने की जरूरत है कि वायरस स्पर्म के अंदर सक्रिय है या नहीं। अगर है तो कितने समय सक्रिय रहता है। क्या उससे खतरा है। ऐसे में ये कहना अभी मुश्किल है कि शारीरिक संबंध से संक्रमण फैल सकता है या नहीं। 

इबोला और जीका भी ऐसी ही स्थिति थी : 
ब्रिटेन की शेफील्ड यूनिवर्सिटी में एंड्रोलॉजी के प्रोफेसर एलेन पैसी का कहना है कि कोविड-19 सेक्सुअली ट्रांसमिट होता है कि नहीं, अभी तक इसके कोई पुख्ता परिणाम नहीं मिले हैं। इबोला और जीका वायरस के मामलों में भी ऐसा ही हुआ था। साथ ही पुरुष प्रजनन पर कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

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