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कोविड-19: बाहर जाने के ल‍िए फ‍िट हैं या अनफ‍िट... बताएगी एंटीबॉडी, तभी मिलेगा इम्‍युन‍िटी पासपोर्ट

लखनऊ, कुमार संजय। जरूरी नहीं कि कोरोना संक्रमित के संपर्क में आते ही आप इसका शिकार हो जाएं, क्योंकि वायरस के बॉडी में आते ही शरीर में इससे लड़ने वाले सिपाही तैयार हो जाते हैं। इसे एंटीबॉडी कहते हैं। जिनकी एंटीबॉडी यानी सिपाही मजबूत होते हैं, वो कोराेना संक्रमित के संपर्क में आने पर भी बीमार नहीं होते। आपकी यह एंटीबॉडी आपके लिए यात्रा और काम पर लौटने के लिए इम्युनिटी पासपोर्ट का काम करेगी।
कोरोना संक्रमण से निपटने या प्राकृतिक रूप से यदि शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बन जाती है तो उसमें संक्रमण की आशंका कम हो जाती है। एंटीबॉडी जांच की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो रही है। किंग जार्ज मेडिकल विवि, राममनोहर लोहिया और संजय गांधी पीजीआई एंटी बाडी जांच शुरू करने की कोशिश में लगे हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ जिनमें एंटीबॉडी होगी उनमें ओके की मुहर लग जाएगी। इम्युनिटी पासपोर्ट पर काम पूरे विश्व में तेजी से हो रहा है।

शोध जारी है
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस पर कहा है कि इम्यूनिटी पासपोर्ट के शोध जारी है देखा जा रहा है कि किसी के शरीर में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी बनने पर देखा जा रहा है कि दोबारा उस व्यक्ति में संक्रमण तो नहीं होगा। होगा भी कितने फीसदी लोगों में संक्रमण की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबॉडी बनने के बाद 80 से 90 फीसदी लोगों में संक्रमण की आशंका नहीं होगी वह काम पर जा सकते हैं। एंटीबॉडी जिनमें बन चुकी है वह काम पर जा सकेंगे लेकिन दूसरे एहतियात की जरूरत रहेगी। एंटीबॉडी बनने की जांच के बाद इम्यूनिटी पासपोर्ट दिया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ने इम्युनिटी पासपोर्ट इन केंटेक्सट आफ कोविद -19 विषय़ पर जारी गाइड लाइन में कहा कि वायरस एसएआरएस-कोवी-2 का मुकाबला इसके कारण शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी कर सकती है। यह एंटीबॉडी एक तरह से दुनियाभर के लोगों के लिए काम पर लौटने और यात्रा करने के लिए इम्यूनिटी पासपोर्ट की तरह हो सकती है।

क्या है इम्यूनिटी पासपोर्ट
कुदरती संक्रमण के माध्यम से एक वायरस से शरीर में इम्यूनिटी पाना लम्बी प्रक्रिया है और आमतौर पर इसमें 7 से 15 दिन तक का समय लग जाता है। देश में क्लीनिकल इम्युनोलाजी के संस्थापक प्रो. आरएन मिश्रा और पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्ट प्रो.विकास अग्रवाल कहते है कि एंटीबॉडी इम्यूनोग्लोबुलिन नाम का प्रोटीन हैं। शरीर टी-सेल्स भी बनाता है जो वायरस से संक्रमित अन्य कोशिकाओं को ढूंढ़कर मारती हैं। इसे सेल्यूलर इम्यूनिटी कहा जाता है। एंटीबॉडी और टी-सेल्स साथ मिलकर वायरस का सफाया कर सकती हैं, और अगर इनका रिस्पांस अच्छा होता है तो आगे दोबारा संक्रमण को रोका जा सकता है। एंटी जांच के बाद किसी को भी काम पर जाने के लिए ओके किया जा सकता है।

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